कैसे कहुँ याद तेरी आती है |

कभी भूले ही नहीं तुझे,
तो कैसे कहुँ याद तेरी आती है |
तेरे जाने का यक़ीन नहीं मुझे,
तो कैसे कहुँ याद तेरी आती है |

अक्सर जहाँ हम दोस्त मिला करते थे,
आज वो तेरी गलियां भी मुझे डराती है |
तू वापिस नहीं आएगा ये भरोसा नहीं मुझे,
तो कैसे कहुँ याद तेरी आती है |

कदमताल जहाँ हमने मिलाए थे,
उन रास्तों पर परछाईं अब भी तेरी है |
जब हमने संग ठहाके लगाए थे,
कानों में गूँजती अब भी वो हँसी तेरी है |
तेरा हँसता हुआ चेहरा, अब तक भूला ना मुझे,
तो कैसे कहुँ याद तेरी आती है |

होली आकर चली गई, दिवाली भी गुज़र जाएगी |
इस दिल और दिमाग से, तेरी याद कभी न जाती है |
हर लम्हा तेरे आने का इंतज़ार है मुझे,
तो कैसे कहुँ याद तेरी आती है |
कभी भूले ही नहीं तुझे,
तो कैसे कहुँ याद तेरी आती है |

Ashok’s Diary

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